Saturday, December 6, 2025

म्यूचुअल फंड में फ्रंट-रनिंग रोकने के लिए एएमएफआई का नया एसओपी

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) ने म्यूचुअल फंड उद्योग में फ्रंट-रनिंग और बाजार दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:

1. नियामक ढांचा

  • 1 नवंबर 2024 से, म्यूचुअल फंड सेबी के (इनसाइडर ट्रेडिंग का निषेध) विनियम, 2015 (पीआईटी विनियम) के दायरे में आ गए हैं।

  • एएमएफआई ने फ्रंट-रनिंग (बड़े लेनदेन से पहले अपने लाभ के लिए व्यापार) रोकने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया है।

2. चरणबद्ध क्रियान्वयन रोडमैप

तारीखलागू होने वाले फंड
2 नवंबर 202410,000 करोड़ रुपये से अधिक एयूएम वाली इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाएं
2 फरवरी 202510,000 करोड़ रुपये से कम एयूएम वाली इक्विटी योजनाएं
2 मई 2025सभी प्रकार की योजनाएं (एयूएम की परवाह किए बिना)
2 अगस्त 2025हाइब्रिड, डेट, कमोडिटी, REITs, InvITs आदि

3. प्रमुख आवश्यकताएं

  • संस्थागत तंत्र: प्रत्येक एएमसी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी/मुख्य अनुपालन अधिकारी की देखरेख में एक निगरानी तंत्र स्थापित करना होगा।

  • स्वचालित अलर्ट सिस्टम: एएमसी को संदिग्ध व्यापार गतिविधियों का पता लगाने के लिए पर्याप्त सिस्टम विकसित करने होंगे।

  • साप्ताहिक निगरानी: अलर्ट का साप्ताहिक विश्लेषण कर निदेशक मंडल/ट्रस्टियों को सूचित करना।

  • क्वार्टरली रिपोर्टिंग: संदिग्ध ब्रोकर के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट तिमाही आधार पर ट्रस्टियों और सेबी को देनी होगी।

4. कर्मचारी-विशेष नियंत्रण

  • निर्दिष्ट कर्मचारी: मुख्य निवेश अधिकारी, फंड मैनेजर, डीलर आदि के व्यक्तिगत लेनदेन पर नजर।

  • पैन-आधारित निगरानी: ऐसे कर्मचारियों और उनके तत्काल परिवार के सदस्यों के पैन से एक्सचेंज/डिपॉजिटरी डेटा प्राप्त करना।

  • अनिवार्य छुट्टी: फंड मैनेजर और डीलर को प्रति वर्ष कम से कम 10 कार्यदिवस की अनिवार्य छुट्टी (एक बार में कम से कम 5 दिन लगातार) लेनी होगी।

  • समझौतों में खंड: कर्मचारी अनुबंध/ब्रोकर समझौतों में बाजार दुरुपयोग के मामले में कार्रवाई के प्रावधान शामिल करने होंगे।

5. दलालों के खिलाफ कार्रवाई

  • यदि संदिग्ध अलर्ट किसी ब्रोकर की भूमिका दर्शाते हैं, तो एएमसी को उचित कार्रवाई (समझौता समाप्ति सहित) करनी होगी।

  • ब्रोकर एम्पैनलमेंट फॉर्म में इसके लिए विशेष खंड जोड़ना होगा।

6. सहयोग और सूचना साझाकरण

  • लागत कम रखने के लिए, एएमसी आपस में निगरानी प्रणाली, आंतरिक नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी साझा कर सकते हैं।

7. पृष्ठभूमि और आवश्यकता

  • हाल के वर्षों में कुछ मामलों में फंड मैनेजरों/वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा फंड के गिरते एनएवी से पहले अपनी निजी यूनिट्स निकाल लेने की घटनाएं सामने आई थीं।

  • सेबी ने 'अंदरूनी व्यापार' की परिभाषा का दायरा बढ़ाया है – अब कोई भी व्यक्ति जिसके पास अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी तक पहुंच है, वह पीआईटी विनियमों के दायरे में आ सकता है।

निष्कर्ष

ये कदम म्यूचुअल फंड उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने, निवेशक हितों की रक्षा करने और बाजार अखंडता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं। नए मानदंडों से एएमसी पर निगरानी और अनुपालन की जिम्मेदारी बढ़ेगी, जिससे दीर्घकाल में निवेशकों का विश्वास मजबूत होने की उम्मीद है। 

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